भारत में गोल्ड फंड में नया निवेश रुका: आपकी SIP पर क्या असर होगा
16 अक्टूबर 2026 से 17 फंड हाउस ने गोल्ड फंड-ऑफ-फंड्स में नया पैसा लेना बंद कर दिया। क्या रुका है, क्या चालू है, ऐसा क्यों हुआ और निवेशक अब क्या करें।
शेयर, म्यूचुअल फ़ंड, सोना या प्रॉपर्टी बेचकर हुए मुनाफ़े (या नुकसान) पर टैक्स, बिना सैलरी वाले निवेशकों के लिए। नुकसान का सेट-ऑफ़, ₹1.25 लाख की छूट और 0% स्लैब शामिल।
STCG 20%: कोई छूट नहीं LTCG 12.5%: पहले ₹1,25,000 टैक्स-फ़्री (शेयर और इक्विटी फ़ंड)
इक्विटी LTCG छूट
लॉस (नुकसान)
कैपिटल लॉस सिर्फ़ कैपिटल गेन्स घटाता है, आपकी सैलरी या अन्य आय कभी नहीं। शॉर्ट-टर्म लॉस किसी भी गेन को घटा सकता है; लॉन्ग-टर्म लॉस सिर्फ़ लॉन्ग-टर्म गेन को। पहले इस साल का नुकसान लगता है, फिर पुराना; जो बचे वह आगे जाता है।
टैक्स-फ़्री 0% स्लैब: ₹4,00,000 में से ₹4,00,000 बाकी (आय + गेन्स)
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यह कैलकुलेटर रिटायर्ड लोगों, गृहिणियों, छात्रों, ट्रेडर्स, फ़्रीलांसर्स और हर उस व्यक्ति के लिए है जिसकी सैलरी नहीं है और जिसने साल में शेयर, म्यूचुअल फ़ंड, सोना या प्रॉपर्टी बेची। यह उन गेन्स पर टैक्स निकालता है, साथ में आपकी अन्य आय जैसे ब्याज, किराया या पेंशन भी।
कैपिटल गेन्स सिर्फ़ सामान्य स्लैब से टैक्स नहीं होते। हर तरह के गेन की अपनी दर है, नुकसान सिर्फ़ कुछ तरीकों से सेट-ऑफ़ हो सकते हैं, और ₹1.25 लाख की इक्विटी छूट या बचे हुए 0% स्लैब से आपके गेन्स का कुछ हिस्सा टैक्स-फ़्री हो सकता है। कैलकुलेटर ये सब कानून के तय क्रम में लगाता है।
लिस्टेड शेयर और इक्विटी फ़ंड के लाभ पर FY 2026-27 का टैक्स, 60 से कम उम्र के रेज़िडेंट के लिए, बिना सैलरी या दूसरी आय के, सेस सहित:
| लाभ | LTCG, नई रिजीम | LTCG, पुरानी रिजीम | STCG, नई रिजीम | STCG, पुरानी रिजीम |
|---|---|---|---|---|
| ₹2 लाख | ₹0 | ₹0 | ₹0 | ₹0 |
| ₹5 लाख | ₹0 | ₹16,250 | ₹20,800 | ₹39,000 |
| ₹10 लाख | ₹61,750 | ₹81,250 | ₹1,24,800 | ₹1,56,000 |
| ₹20 लाख | ₹1,91,750 | ₹2,11,250 | ₹3,32,800 | ₹3,64,000 |
यहाँ हर स्तर पर नई रिजीम सस्ती है, क्योंकि उसकी बेसिक छूट ₹4 लाख है। बिक्री को अलग-अलग वित्त वर्षों में बाँटकर हर साल ₹1.25 लाख की LTCG छूट लेने से टैक्स और घटता है।
सैलरी भी हो तो नई रिजीम टैक्स कैलकुलेटर और पुरानी रिजीम टैक्स कैलकुलेटर गेन्स को उसके ऊपर जोड़कर टैक्स निकालते हैं।
| गेन का प्रकार | कितने समय रखा | टैक्स | सेक्शन (2025 Act · 1961 Act) |
|---|---|---|---|
| लिस्टेड शेयर, इक्विटी फ़ंड (STCG) | 12 महीने तक | 20% | 196 · 111A |
| लिस्टेड शेयर, इक्विटी फ़ंड (LTCG) | 12 महीने से ज़्यादा | ₹1.25 लाख से ऊपर 12.5% | 198 · 112A |
| सोना, प्रॉपर्टी, अनलिस्टेड शेयर (LTCG) | 24 महीने से ज़्यादा | 12.5%, बिना इंडेक्सेशन | 197 · 112 |
| लिस्टेड बॉन्ड, गोल्ड ETF (LTCG) | 12 महीने से ज़्यादा | 12.5%, बिना इंडेक्सेशन | 197 · 112 |
| अप्रैल 2023 से खरीदे डेट फ़ंड | कोई भी अवधि | स्लैब दर | सामान्य स्लैब |
| अन्य शॉर्ट-टर्म गेन्स | लॉन्ग-टर्म अवधि से कम | स्लैब दर | सामान्य स्लैब |
FY 2026-27 में 60 से कम उम्र के रेज़िडेंट, बिना सैलरी। टैक्स में 4% सेस शामिल है और दोनों रिजीम में दिखाया गया है।
| निवेशक | नुकसान से पहले गेन्स | नई रिजीम टैक्स | पुरानी रिजीम टैक्स |
|---|---|---|---|
| रिटायर्ड: ₹3L ब्याज, ₹2L इक्विटी LTCG | ₹2,00,000 | ₹0 | ₹9,750 |
| ट्रेडर: ₹6L इक्विटी STCG, ₹3L इक्विटी LTCG | ₹9,00,000 | ₹64,350 | ₹95,550 |
| ₹8L किराया और ब्याज, ₹1.25L इक्विटी LTCG | ₹1,25,000 | ₹0 | ₹75,400 |
| ₹6L ब्याज, ₹1L STCG, ₹2.5L LTCG, ₹4L शॉर्ट-टर्म लॉस | ₹3,50,000 | ₹0 | ₹33,800 |
रिटायर्ड व्यक्ति नई रिजीम में कुछ नहीं देता: LTCG का ₹1.25 लाख छूट में है और बाकी ब्याज के बाद बचे 0% स्लैब में समा जाता है। ट्रेडर सिर्फ़ 0% स्लैब और छूट से ऊपर के गेन्स पर टैक्स देता है। तीसरे निवेशक का LTCG छूट के भीतर है, इसलिए उसका पूरा टैक्स स्लैब आय से आता है। आख़िरी मामले में शॉर्ट-टर्म लॉस सारे गेन्स मिटा देता है और बाकी आगे ले जाता है, और नई रिजीम की रिबेट ब्याज पर टैक्स को कवर कर देती है।
कोई दूसरी आय न हो तो नई रिजीम में ₹5.25 लाख तक: ₹1.25 लाख की LTCG छूट और ₹4 लाख की बेसिक छूट। उसके ऊपर 12.5% और सेस:
बेसिक छूट को गेन्स के सामने सिर्फ़ रेज़िडेंट इस्तेमाल कर सकते हैं।
हाँ। सैलरी बेसिक छूट इस्तेमाल कर लेती है, और गेन्स ₹12 लाख की रिबेट सीमा में गिने जाते हैं।
सैलरी और गेन्स दोनों हों तो नई या पुरानी रिजीम कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।
गेन्स पर दरें एक जैसी हैं, इसलिए फ़र्क 0% स्लैब और आपकी अन्य आय पर रिबेट से आता है। नई रिजीम का बड़ा 0% स्लैब और ₹12 लाख की रिबेट आमतौर पर जीतते हैं। अपने आँकड़ों की तुलना के लिए रिजीम बदलकर देखें।
बिज़नेस इनकम न हो तो ITR-2, हो तो ITR-3। ITR-1 और ITR-4 में सिर्फ़ ₹1.25 लाख तक का इक्विटी LTCG चलता है और कोई नुकसान नहीं। साल में ₹10,000 से ज़्यादा टैक्स बनता हो तो गेन्स पर एडवांस टैक्स भरें।
नई रिजीम में नहीं। ₹12 लाख की सीमा जाँचते समय आपके गेन्स गिने जाते हैं, पर रिबेट सिर्फ़ स्लैब टैक्स घटाती है, STCG या LTCG का टैक्स कभी नहीं। पुरानी रिजीम में ₹12,500 की रिबेट (₹5 लाख तक की आय) इक्विटी STCG और अन्य LTCG पर टैक्स भी घटा सकती है, पर 112A वाले इक्विटी LTCG पर नहीं।
नहीं। रिबेट (87A, अब सेक्शन 156) सिर्फ़ निवासी (रेज़िडेंट) व्यक्तियों के लिए है। अनिवासी को 0% स्लैब से ऊपर पहले रुपये से स्लैब टैक्स देना होता है, भले कुल आय ₹12 लाख से कम हो।
सैलरी के अलावा जो कुछ भी आपकी स्लैब दर पर टैक्स होता है: FD और RD का ब्याज, फ़्रीलांस या कंसल्टिंग फ़ीस, फ़ैमिली पेंशन, या इनकम टैक्स रिफ़ंड पर मिला ब्याज। PPF के ब्याज जैसी टैक्स-फ़्री आय छोड़ दें, और शेयर व म्यूचुअल फ़ंड के गेन कैपिटल गेन्स वाले सेक्शन में डालें।
हाँ। FD का ब्याज आपकी आय में जुड़ता है और आपकी स्लैब दर पर टैक्स होता है, हर साल जितना बनता है, भले अभी हाथ में न आया हो। बैंक का 10% TDS सिर्फ़ एडवांस है: उसे क्रेडिट के रूप में लें, और ऊँचे स्लैब में हों तो बाकी भरें।
हर तरह के गेन की अपनी दर है। लिस्टेड शेयर और इक्विटी फ़ंड 12 महीने तक रखने पर (STCG) 20% लगता है। इससे ज़्यादा रखने पर (LTCG) साल में ₹1.25 लाख से ऊपर के गेन पर 12.5%। अन्य लॉन्ग-टर्म गेन्स पर बिना इंडेक्सेशन 12.5%, और डेट फ़ंड व अन्य शॉर्ट-टर्म गेन्स आपकी आय में जुड़कर स्लैब दर से टैक्स होते हैं। नुकसान पहले सेट-ऑफ़ होते हैं, और अंत में 4% सेस जुड़ता है।
अक्सर नहीं, या उम्मीद से कम। रेज़िडेंट का बचा हुआ 0% स्लैब (नई रिजीम में ₹4 लाख, पुरानी में 60 से कम उम्र पर ₹2.5 लाख) STCG और LTCG को भी समा सकता है। कोई और आय न हो तो नई रिजीम में ₹4 लाख तक इक्विटी STCG, या छूट मिलाकर ₹5.25 लाख तक इक्विटी LTCG टैक्स-फ़्री है।
शॉर्ट-टर्म लॉस किसी भी कैपिटल गेन को घटा सकता है, शॉर्ट या लॉन्ग। लॉन्ग-टर्म लॉस सिर्फ़ लॉन्ग-टर्म गेन्स को। दोनों में से कोई भी सैलरी, ब्याज या अन्य आय नहीं घटा सकता। इस साल के नुकसान पिछले सालों से आगे लाए गए नुकसान से पहले सेट-ऑफ़ होते हैं।
नुकसान वाले साल के बाद 8 साल तक, बशर्ते उस साल का रिटर्न ड्यू डेट तक भरा गया हो। आगे लाए गए नुकसान का प्रकार वही रहता है: शॉर्ट-टर्म लॉस अब भी किसी भी गेन को घटाता है, लॉन्ग-टर्म सिर्फ़ लॉन्ग-टर्म गेन्स को।
साल भर से ज़्यादा रखे इक्विटी निवेश बेचकर दोबारा खरीदना, ताकि हर साल ₹1.25 लाख तक का LTCG टैक्स-फ़्री बुक हो जाए। इससे आपकी लागत बढ़ती है, इसलिए भविष्य के गेन का कम हिस्सा टैक्स योग्य रहता है। कैलकुलेटर दिखाता है कि इस साल की छूट में से कितनी बची है।
1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदी गई यूनिट्स पर, कितने भी समय रखें, बिना इंडेक्सेशन आपकी स्लैब दर से टैक्स लगता है। ये गेन्स "स्लैब दरों पर टैक्स वाले गेन" में डालें।
सिर्फ़ तब जब कुल आय ₹50 लाख से ऊपर हो। STCG और LTCG पर सरचार्ज 15% तक सीमित है, चाहे अन्य आय पर ज़्यादा हो, और हर सीमा के ठीक ऊपर मार्जिनल रिलीफ़ मिलती है।
लिस्टेड शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड 12 महीने के बाद लॉन्ग-टर्म होते हैं। प्रॉपर्टी, सोना और अनलिस्टेड शेयर जैसी ज़्यादातर दूसरी संपत्तियाँ 24 महीने के बाद। 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद ख़रीदे गए डेट म्यूचुअल फ़ंड पर, कितना भी रखें, स्लैब दर से टैक्स लगता है।
दोनों में से कोई नहीं। यह हर व्यक्ति के लिए सालाना ₹1.25 लाख है, आपके सभी लिस्टेड शेयर और इक्विटी फ़ंड को मिलाकर। परिवार के हर सदस्य को अपनी छूट मिलती है, इसलिए जीवनसाथी या माता-पिता के नाम के निवेश पर अलग छूट है।
1 फ़रवरी 2018 से पहले ख़रीदे लिस्टेड शेयर और इक्विटी फ़ंड की लागत, आपके दिए दाम और 31 जनवरी 2018 के दाम में से जो ज़्यादा हो, वह मानी जाती है (पर बिक्री दाम से ज़्यादा नहीं)। उस तारीख़ से पहले का गेन टैक्स से बाहर रहता है। उसी लागत पर निकला गेन डालें।
24 महीने से ज़्यादा रखा हो तो यह लॉन्ग-टर्म है और बिना इंडेक्सेशन 12.5% पर टैक्स होता है, यही यह कैलकुलेटर मानता है। 23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदी ज़मीन या इमारत पर निवासी चाहे तो इंडेक्सेशन के साथ 20% दे सकता है, अगर वह कम बने, इसलिए उसे अलग से निकालें। नए घर में दोबारा निवेश (54/54EC) से टैक्स बच सकता है, पर वह यहाँ शामिल नहीं है।
पहले नुकसान सेट-ऑफ़ होते हैं। लॉन्ग-टर्म लॉस लॉन्ग-टर्म गेन्स घटाते हैं (पहले अन्य LTCG, फिर इक्विटी LTCG, ताकि ₹1.25 लाख की छूट आख़िर तक बची रहे)। शॉर्ट-टर्म लॉस किसी भी गेन को घटाते हैं, उस क्रम में जिसमें टैक्स कम बने। इस साल के नुकसान आगे लाए गए नुकसान से पहले लगते हैं, और बचा हुआ आगे जाता है।
स्लैब दर वाले गेन्स आपकी अन्य आय में जुड़कर स्लैब दर से टैक्स होते हैं। अगर वह आय 0% स्लैब से कम है, तो बचा हिस्सा पहले STCG, फिर अन्य LTCG, फिर ₹1.25 लाख की छूट से ऊपर के इक्विटी LTCG को समाता है। जो बचे, उस पर 20% (इक्विटी STCG) या 12.5% (LTCG) टैक्स लगता है।
87A रिबेट की जाँच गेन्स मिलाकर कुल आय पर होती है। नई रिजीम में यह सिर्फ़ स्लैब टैक्स घटाती है; पुरानी में इक्विटी STCG और अन्य LTCG पर टैक्स भी। ₹50 लाख से ऊपर सरचार्ज जुड़ता है (गेन्स पर 15% तक सीमित), फिर 4% सेस, और कुल को नज़दीकी ₹10 पर राउंड किया जाता है।
इक्विटी LTCG टैक्स
12.5% × (नुकसान के बाद इक्विटी LTCG − ₹1.25L − बचा 0% स्लैब)
इक्विटी STCG टैक्स
20% × (नुकसान के बाद इक्विटी STCG − बचा 0% स्लैब)
कुल टैक्स
(स्लैब टैक्स + विशेष दर टैक्स − रिबेट + सरचार्ज) × 1.04
SIPCafe के कैलकुलेटर और गाइड सिर्फ़ जानकारी और योजना बनाने के लिए हैं, ये निवेश, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं हैं। नतीजे आपके भरे गए अनुमानों पर आधारित अनुमान हैं; असली रिटर्न अलग हो सकते हैं और इनकी कोई गारंटी नहीं है। निवेश का फ़ैसला लेने से पहले किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से बात करने पर विचार करें। SIPCafe कोई पंजीकृत निवेश सलाहकार नहीं है और किसी ख़ास शेयर, फ़ंड या स्कीम की सिफ़ारिश नहीं करता। हर निवेश में बाज़ार का जोखिम होता है; निवेश करने से पहले फ़ंड या स्कीम के आधिकारिक दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें।
टैक्स के आँकड़े आपके चुने गए टैक्स वर्ष के आयकर अधिनियम के नियमों पर, हमारी समझ के अनुसार, आधारित हैं और कुछ ख़ास स्थितियों (जैसे दुर्लभ सरचार्ज या सेट-ऑफ़ के मामले) को सरल बनाते हैं। हर बजट के साथ टैक्स कानून बदलता है, इसलिए रिटर्न भरने से पहले अपने अंतिम आँकड़े किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या आयकर विभाग के ई-फ़ाइलिंग पोर्टल से जाँच लें।
16 अक्टूबर 2026 से 17 फंड हाउस ने गोल्ड फंड-ऑफ-फंड्स में नया पैसा लेना बंद कर दिया। क्या रुका है, क्या चालू है, ऐसा क्यों हुआ और निवेशक अब क्या करें।